1. परिंदों को नहीं दी जाती तालीम उडानों की, वो खुद तय करते हैं मंजिल आसमानों की, रखते हैैं हौंसला जो आसमान को छूने का , उन्हें नहीं होती परवाह गिर जाने की। 2. सुंदर सूूूर सजाने को साज बनाता हूँ, नौसिखिये परिंदों को बाज बनाता हूँ, समंदर तो परखता है हौंसले कश्तियों के, और मैं डूबति कश्तियों को जहाज बनाता हूँ। 3. सुना है आज समंदर को गुमान आया है, उधर ही ले चलों कश्ती जिधर तूूूूफान आया है, चिर देंगे मेहनत से लहरों का सीना, खुशी है कि आज हमें किसी ने आजमााया है। 4. जो सफर की शुरूआत करते हैं, वो मंजिल भी पा लेते हैं, बस एक बार चलने का हौंसला जरू...