Maa kah ek kahani (Maithili Sharan Gupta) मॉं कह एक कहानी (मैथीलशरण गुप्त की कविता) Maa kah ek kahani Maithili sharan gupta " माँ कह एक कहानी।" बेटा समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी ?" " कहती है मुझसे यह चेटी , तू मेरी नानी की बेटी कह माँ कह लेटी ही लेटी , राजा था या रानी ? माँ कह एक कहानी।" " तू है हठी , मानधन मेरे , सुन उपवन में बड़े सवेरे , तात भ्रमण करते थे तेरे , जहाँ सुरभि मनमानी।" " जहाँ सुरभि मनमानी! हाँ माँ यही कहानी।" Maa kah ek kahani (Maithili Sharan Gupta) मॉं कह एक कहानी (मैथीलशरण गुप्त की कविता) वर्ण वर्ण के फूल खिले थे , झलमल कर हिमबिंदु झिले थे , हलके झोंके हिले मिले थे , लहराता था पानी।" " लहराता था पानी , हाँ-हाँ यही कहानी।" " गाते थे खग कल-कल स्वर से , सहसा एक हंस ऊपर से , गिरा बिद्ध होकर खग शर से , हुई पक्षी की हानी।" " हुई पक्षी की हानी ? करुणा भरी कहानी!" चौंक उन्होंने उसे उठाया , नया जन्म सा उसने पाया , इतने में आखेटक आया , लक्ष सिद्धि का मानी।...