Desh ki mati देश की माटी - रविंद्रनाथ ठाकुर Rabindranath Tagore

desh ki mati by Rabindranath tagore
Desh ki mati
Rabindranath Tagore - Desh ki mati
देश की माटी देश का जल
हवा देश की देश के फल
सरस बनें प्रभू सरस बनें।


देश के घर और देश के घाट
देश के वन और देश के बाट
सरल बनें प्रभू सरल बनें।


देश के तन और देश के मन
देश के घर के भाई-बहन
विमल बनें प्रभू विमल बनें।

             -  रविंद्रनाथ ठाकुर
                Rabindranath Tagore - Desh ki mati

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