नई उड़ान - Nayi Udaan
नई उड़ान
उड़ते हुए मुझे बहुत दूर जाना है।
पँखो में न जोर न ही सहारा है।
ये भी क्या कम था,
जो शिकारी ने मुझ पर थामा निशाना है।
होकर लहूलुहान गिरा मैं भू पर,
देख रहा मुझे सारा जमाना है।
लेकिन मेरा मन अभी नहीं हारा है,
उठा मैं जतपत और उड़ा ,
क्योकि मुझे बहुत दूर जाना है।
कविता से मिली सीख :- किसी भी परिस्थिति में हार न मानना निरन्तर आगे बढ़ना
Nai Udaan
उड़ते हुए मुझे बहुत दूर जाना है।
पँखो में न जोर न ही सहारा है।
ये भी क्या कम था,
जो शिकारी ने मुझ पर थामा निशाना है।
होकर लहूलुहान गिरा मैं भू पर,
देख रहा मुझे सारा जमाना है।
लेकिन मेरा मन अभी नहीं हारा है,
उठा मैं जतपत और उड़ा ,
क्योकि मुझे बहुत दूर जाना है।
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